जशपुर में प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर, वन बल प्रमुख ने किया निरीक्षण
जशपुरनगर, 12 अगस्त। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ अरुण पाण्डेय, भा.व.से. ने जशपुर प्रवास के दौरान जिले के विभिन्न प्राकृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थलों की विकास संभावनाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखकर कार्य करने के निर्देश दिए।
भैरव पहाड़ का किया निरीक्षण
मनोरा विकासखंड के अंतर्गत स्थित भैरव पहाड़ का भ्रमण कर उन्होंने स्थल की प्राकृतिक और धार्मिक विशेषताओं की जानकारी ली। इस दौरान स्थानीय जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक मान्यताओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।
वन बल प्रमुख ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भैरव पहाड़ के विकास में इसकी प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जनजातीय संस्कृति को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही सोगड़ा आश्रम से जुड़ी धार्मिक आस्था और स्थानीय भावनाओं का भी सम्मान सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने भैरव पहाड़ को प्रकृति, आस्था और जनजातीय संस्कृति के समन्वित स्वरूप में विकसित करने की संभावनाओं पर अधिकारियों से चर्चा की।
पर्यावरण वाटिका का लिया जायजा
इसके बाद उन्होंने वन परिक्षेत्र कांसाबेल के ग्राम बगिया में निर्मित पर्यावरण वाटिका का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां पौधरोपण, हरित क्षेत्र विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया।
उन्होंने पर्यावरण वाटिका को स्थानीय समुदाय, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए पर्यावरण जागरूकता एवं प्रकृति शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। वाटिका में स्थानीय और उपयोगी प्रजातियों के पौधों के संरक्षण, बेहतर रखरखाव तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
प्रकृति और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर
जशपुर प्रवास के दौरान प्राकृतिक स्थलों, धार्मिक केंद्रों और पर्यावरणीय अधोसंरचनाओं के संरक्षण एवं विकास को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई।
अरुण पाण्डेय ने कहा कि जशपुर की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता, जनजातीय संस्कृति और धार्मिक आस्था जिले की विशिष्ट पहचान हैं। इसलिए विकास कार्यों में स्थानीय परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने भैरव पहाड़, हनुमान टेकरी और पर्यावरण वाटिका जैसे स्थलों को स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप प्रकृति आधारित एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से जनभागीदारी के साथ विकसित करने के निर्देश दिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन के अवसर बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रवास के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
इस अवसर पर सरगुजा वृत्त अंबिकापुर के दिलराज प्रभाकर, वनमंडलाधिकारी बलरामपुर आलोक वाजपेयी, वनमंडलाधिकारी जशपुर शशि कुमार सहित जशपुर वनमंडल के उपवनमंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्राधिकारी और वन अमला उपस्थित रहा।



